कुंडली में Profession और शिक्षा का संबंध: Career के लिए शिक्षा के ज्योतिषीय संकेत

1. कुंडली में शिक्षा और Profession का क्या संबंध है? वैदिक ज्योतिष में शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के पूर्व जन्मों के संस्कारों और इस जन्म के ‘कर्म’ (Profession) का आधार है। आधुनिक युग में विद्यार्थियों और अभिभावकों के सामने सबसे बड़ा प्रश्न यह होता है कि “कौन […]

कुंडली में Profession और शिक्षा का संबंध: Career के लिए शिक्षा के ज्योतिषीय संकेत Read More »

द्विग्रह योग: दो ग्रहों की युति का प्रोफेशन और करियर पर प्रभाव

भूमिका: करियर और ग्रहों का अद्भुत मिलन वैदिक ज्योतिष में जीवनयापन और आजीविका का विचार करते समय ग्रहों की स्थितियाँ अत्यंत महत्वपूर्ण मानी गई हैं। जब हम जन्मकुंडली का विश्लेषण करते हैं, तो अक्सर कोई एक ग्रह अकेला बैठकर फल नहीं देता। कई बार दो ग्रह एक ही भाव (घर) में एक साथ स्थित होते

द्विग्रह योग: दो ग्रहों की युति का प्रोफेशन और करियर पर प्रभाव Read More »

लग्न से द्वादश भाव तक दशमेश की स्थिति और संभावित करियर

भूमिका: कर्म, आजीविका और वैदिक ज्योतिष वैदिक ज्योतिष में मानव जीवन के चार पुरुषार्थों—धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—में ‘अर्थ’ (जीविकोपार्जन या धन) और ‘कर्म’ का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। आधुनिक युग में हर व्यक्ति के मन में अपने करियर, नौकरी और व्यवसाय को लेकर कई प्रश्न उठते हैं। “मेरा करियर किस दिशा में

लग्न से द्वादश भाव तक दशमेश की स्थिति और संभावित करियर Read More »

12 राशियां और उनसे जुड़ी आजीविका का रहस्य

वैदिक ज्योतिष में करियर का चुनाव केवल व्यक्तिगत रुचि का विषय नहीं है, बल्कि यह हमारे प्रारब्ध और ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ हमारे जुड़ाव का प्रतिबिंब है। प्राचीन ऋषियों ने संपूर्ण ब्रह्मांड को एक ‘विराट पुरुष’ या काल पुरुष के रूप में देखा है। इस काल पुरुष के 12 अंग हमारी 12 राशियों का प्रतिनिधित्व

12 राशियां और उनसे जुड़ी आजीविका का रहस्य Read More »

27 नक्षत्र और आपका करियर: नक्षत्रों के सूक्ष्म प्रभाव से जानें अपनी सही आजीविका

वैदिक ज्योतिष में जब हम करियर या आजीविका का विचार करते हैं, तो अक्सर हमारी दृष्टि केवल ग्रहों और भावों (विशेषकर दशम भाव) तक सीमित रह जाती है। लेकिन प्राचीन ऋषियों ने नक्षत्रों को ज्योतिष की ‘आत्मा’ माना है। नक्षत्र वह सूक्ष्म आधार हैं जो यह तय करते हैं कि एक ही ग्रह अलग-अलग व्यक्तियों

27 नक्षत्र और आपका करियर: नक्षत्रों के सूक्ष्म प्रभाव से जानें अपनी सही आजीविका Read More »

नौ ग्रह और व्यवसाय: वैदिक ज्योतिष का संपूर्ण मार्गदर्शन (Planets and Profession)

वैदिक ज्योतिष में ‘आजीविका’ या व्यवसाय का चुनाव केवल जीविकोपार्जन का साधन नहीं है, बल्कि यह हमारे पूर्व जन्मों के संचित कर्मों और प्रारब्ध का प्रकटीकरण है। प्राचीन महर्षियों ने बृहत् पाराशर होरा शास्त्र (BPHS), फलदीपिका, उत्तर कालामृत और जातक पारिजात जैसे कालजयी ग्रंथों में व्यावसायिक प्रवृत्तियों को समझने के लिए गहन सूत्र दिए हैं।

नौ ग्रह और व्यवसाय: वैदिक ज्योतिष का संपूर्ण मार्गदर्शन (Planets and Profession) Read More »

ज्योतिष और आजीविका: करियर चुनाव का शास्त्रीय आधार

 भूमिका: कर्म ही जीवन का आधार है आज के आधुनिक और प्रतिस्पर्धी युग में हर व्यक्ति के मन में अपने करियर को लेकर अनेक प्रश्न होते हैं। “मुझे कौन सा व्यवसाय करना चाहिए?”, “क्या मुझे नौकरी में सफलता मिलेगी या व्यापार में?”—ये सवाल केवल आज के नहीं हैं, बल्कि प्राचीन काल से ही ऋषियों ने

ज्योतिष और आजीविका: करियर चुनाव का शास्त्रीय आधार Read More »

वैधव्य योग: वैदिक ज्योतिष के शास्त्रीय ग्रंथों का एक गंभीर एवं व्यावहारिक विश्लेषण

वैदिक ज्योतिष में विवाह को केवल एक सामाजिक समझौता नहीं, बल्कि दो आत्माओं का आध्यात्मिक मिलन और सोलह संस्कारों में से एक महत्वपूर्ण संस्कार माना गया है। प्राचीन ऋषियों ने दाम्पत्य जीवन की स्थिरता, सुख और दीर्घायु का विचार करने के लिए अनेक सिद्धांतों की रचना की है। इन्हीं सिद्धांतों में से एक है ‘वैधव्य

वैधव्य योग: वैदिक ज्योतिष के शास्त्रीय ग्रंथों का एक गंभीर एवं व्यावहारिक विश्लेषण Read More »

कुंडली में ब्रह्मचर्य योग: विवाह न होने के ज्योतिषीय कारण

नमस्ते पाठकों! ‘Astro With Shagun’ के इस विशेष ब्लॉग में आप सभी का स्वागत है। आज हम एक ऐसे विषय पर चर्चा करेंगे जो ज्योतिष शास्त्र में अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील माना जाता है। विवाह को हिंदू संस्कृति में एक पवित्र संस्कार और जीवन के महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखा जाता है, लेकिन कई

कुंडली में ब्रह्मचर्य योग: विवाह न होने के ज्योतिषीय कारण Read More »

द्विविवाह योग: क्या कुंडली में दूसरे विवाह के संकेत मिलते हैं?

भूमिका: ज्योतिष और जीवन के निर्णय विवाह को भारतीय संस्कृति में सात जन्मों का बंधन माना गया है, लेकिन कई बार ग्रहों की स्थिति जीवन में कुछ अलग मोड़ लेकर आती है। “द्विविवाह योग” का अर्थ है कुंडली में एक से अधिक विवाह की संभावना होना। ज्योतिष शास्त्र में इसे किसी डर या अंधविश्वास के

द्विविवाह योग: क्या कुंडली में दूसरे विवाह के संकेत मिलते हैं? Read More »