विवाह (marriage)

वैधव्य योग: वैदिक ज्योतिष के शास्त्रीय ग्रंथों का एक गंभीर एवं व्यावहारिक विश्लेषण

वैदिक ज्योतिष में विवाह को केवल एक सामाजिक समझौता नहीं, बल्कि दो आत्माओं का आध्यात्मिक मिलन और सोलह संस्कारों में से एक महत्वपूर्ण संस्कार माना गया है। प्राचीन ऋषियों ने दाम्पत्य जीवन की स्थिरता, सुख और दीर्घायु का विचार करने के लिए अनेक सिद्धांतों की रचना की है। इन्हीं सिद्धांतों में से एक है ‘वैधव्य […]

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कुंडली में ब्रह्मचर्य योग: विवाह न होने के ज्योतिषीय कारण

नमस्ते पाठकों! ‘Astro With Shagun’ के इस विशेष ब्लॉग में आप सभी का स्वागत है। आज हम एक ऐसे विषय पर चर्चा करेंगे जो ज्योतिष शास्त्र में अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील माना जाता है। विवाह को हिंदू संस्कृति में एक पवित्र संस्कार और जीवन के महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखा जाता है, लेकिन कई

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द्विविवाह योग: क्या कुंडली में दूसरे विवाह के संकेत मिलते हैं?

भूमिका: ज्योतिष और जीवन के निर्णय विवाह को भारतीय संस्कृति में सात जन्मों का बंधन माना गया है, लेकिन कई बार ग्रहों की स्थिति जीवन में कुछ अलग मोड़ लेकर आती है। “द्विविवाह योग” का अर्थ है कुंडली में एक से अधिक विवाह की संभावना होना। ज्योतिष शास्त्र में इसे किसी डर या अंधविश्वास के

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विवाह में देरी के ज्योतिषीय कारण और समाधान: एक शास्त्रीय विश्लेषण

आकर्षक भूमिका भारतीय संस्कृति में विवाह को केवल एक सामाजिक समझौता नहीं, बल्कि सोलह संस्कारों में से एक ‘पाणिग्रहण संस्कार’ माना गया है। जीवन के एक निश्चित पड़ाव पर पहुँचकर हर युवा और उनके अभिभावकों के मन में एक ही प्रश्न होता है— “विवाह में देरी क्यों हो रही है?” वैदिक ज्योतिष के अनुसार, विवाह

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विवाह के समय का निर्धारण: पाराशरी पद्धति का सूक्ष्म विश्लेषण

भूमिका: विवाह का समय—एक दिव्य संयोग विवाह मानव जीवन की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है। अक्सर लोग पूछते हैं, “शादी कब होगी?” या “क्या अभी विवाह के लिए सही समय है?” वैदिक ज्योतिष में विवाह के समय का निर्धारण केवल अनुमान नहीं, बल्कि एक गहरा गणितीय और आध्यात्मिक विश्लेषण है। महर्षि पाराशर के बृहत्

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विवाह के लिए 12 भावों का सूक्ष्म विश्लेषण: कैसे देखें अपनी वैवाहिक कुंडली?

भूमिका वैदिक ज्योतिष में विवाह केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि एक पवित्र ‘संस्कार’ है। अक्सर लोग विवाह के लिए केवल कुंडली के सातवें भाव को ही देखते हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि हमारे जीवन का हर पक्ष विवाह से प्रभावित होता है। महर्षि पाराशर के बृहत् पाराशर होरा शास्त्र (BPHS) और फलदीपिका जैसे ग्रंथों के अनुसार,

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रज्जु कूट मिलान और वेध मिलान: वैवाहिक सुख के सूक्ष्म नक्षत्र सिद्धांत

आकर्षक भूमिका वैदिक ज्योतिष में विवाह को एक पवित्र संस्कार माना गया है, जहाँ दो व्यक्तियों की ऊर्जाओं का मिलन होता है। अक्सर लोग ‘अष्टकूट मिलान’ के 36 गुणों की चर्चा करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि नक्षत्रों के संसार में कुछ ऐसे सूक्ष्म मिलान भी हैं जो गुणों की संख्या से कहीं

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मंगल दोष का सच और भ्रम: क्या यह वाकई डरावना है?

आकर्षक भूमिका “लड़का/लड़की मंगली है!” — यह वाक्य भारतीय परिवारों में विवाह की चर्चा के दौरान अक्सर एक अनकहे डर की तरह गूँजता है। जैसे ही किसी की कुंडली में ‘मंगल दोष’ (जिसे कुज दोष भी कहा जाता है) की बात आती है, लोग इसे मृत्यु, दुर्घटना या वैवाहिक विच्छेद का पर्याय मान लेते हैं।

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अष्टकूट मिलान क्या है? 36 गुण कैसे निकाले जाते हैं?

भूमिका: नक्षत्रों की गणना में छिपा वैवाहिक सुख विगत लेख में हमने समझा था कि विवाह केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि दो भिन्न ऊर्जाओं का संलयन है। जब हम विवाह के लिए सही साथी की खोज करते हैं, तो अक्सर “36 गुण” की चर्चा सबसे पहले होती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा

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कुंडली मिलान क्या है? विवाह से पहले कुंडली क्यों मिलानी चाहिए?

भूमिका विवाह मानव जीवन का केवल एक सामाजिक उत्सव नहीं है, बल्कि वैदिक संस्कृति में इसे एक अत्यंत पवित्र ‘संस्कार’ माना गया है। यह दो शरीरों का ही नहीं, बल्कि दो आत्माओं, दो परिवारों और दो भिन्न ऊर्जाओं का मिलन है। अक्सर लोग प्रश्न करते हैं कि “जब प्रेम है, पर्याप्त धन है और दोनों

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